"Truth-Love-Compassion", "Act with feeling, Be happy in all situation", "Do not worry, I'm supporting you from back", "Surrender me, I shall take care of you", IIરામ કૃષ્ણ હરિII, IIશ્રી એકલિંગજી વિજયતેII, IIૐ નમ: શિવાયII, IIશ્રી महाकाલ્યૈ નમ:II, IIरामII, IIશ્રી હનુમંતે નમ:II, IIશ્રી સરસ્વતૈય નમ:II, IIશ્રી મહાલક્ષ્મૈય નમ:II, IIૐ નમો નારાયણાયII, IIॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्II, IIॐ નમો ભગવતે વાસુદેવાયII.
About Me
- Faith AND Patience
- MUMBAI, MAHARASHRA, India
- BANKER FOR 16 YEARS, SELF EMPLOYED FOR LAST 7 YEARS
23 August, 2009
Quotes from Famous personalities 10
16 August, 2009
Happy Independence day - Saheed Bhagat Singh
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
(ऐ वतन,) करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्क़िल में है,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हाथ, जिन में है जूनून, कटते नही तलवार से,सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो शोला सा हमारे दिल में है,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हम तो घर से ही थे निकले बाँधकर सर पर कफ़न,जाँ हथेली पर लिए लो बढ चले हैं ये कदम.
ज़िंदगी तो अपनी मॆहमाँ मौत की महफ़िल में है,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज.
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमे न हो ख़ून-ए-जुनून
क्या लड़े तूफ़ान से जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
(ऐ वतन,) करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्क़िल में है,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हाथ, जिन में है जूनून, कटते नही तलवार से,सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से.
और भड़केगा जो शोला सा हमारे दिल में है,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हम तो घर से ही थे निकले बाँधकर सर पर कफ़न,जाँ हथेली पर लिए लो बढ चले हैं ये कदम.
ज़िंदगी तो अपनी मॆहमाँ मौत की महफ़िल में है,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज.
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है,सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमे न हो ख़ून-ए-जुनून
क्या लड़े तूफ़ान से जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
On Independence Day - Gandhiji's famous Poem (by Saint Narsinh Mehta)
વૈષ્ણવ જન તો તેને કિહયે, જે પીડ પરાયી જાણે રે
પર દુખ્ખે ઉપકાર કરે તોયે, મન અિભમાન ના આણે રે
સકળ લોક માન સહુને વંદે, િંનદા ન કરે કેની રે
વાચ કાછ મન િનશ્છળ રાખે ધન ધન જનની તેની રે
સમદૃષ્િટ ને તૃષ્ળા ત્યાગી પરસ્ત્રી જેને માત રે
િજહ્વા થકે અસત્ય ન બોલે પરધન નવ ઝાલે હાથ રે
મોહ માયા વ્યાપે નિહ જેને દૃઢ વૈરાગ્ય જેના મન મા રે
રામ નામ શુ તાળી રે લાગી સકળ તીરથ તેના તન માં રે
વળ લોભી ને કપટ રિહત છે કામ ક્રોધ િનવાર્યા રે
ભળે નરસૈયો તેના દર્શન કરતા કુળ એકોતર તાર્યા રે
પર દુખ્ખે ઉપકાર કરે તોયે, મન અિભમાન ના આણે રે
સકળ લોક માન સહુને વંદે, િંનદા ન કરે કેની રે
વાચ કાછ મન િનશ્છળ રાખે ધન ધન જનની તેની રે
સમદૃષ્િટ ને તૃષ્ળા ત્યાગી પરસ્ત્રી જેને માત રે
િજહ્વા થકે અસત્ય ન બોલે પરધન નવ ઝાલે હાથ રે
મોહ માયા વ્યાપે નિહ જેને દૃઢ વૈરાગ્ય જેના મન મા રે
રામ નામ શુ તાળી રે લાગી સકળ તીરથ તેના તન માં રે
વળ લોભી ને કપટ રિહત છે કામ ક્રોધ િનવાર્યા રે
ભળે નરસૈયો તેના દર્શન કરતા કુળ એકોતર તાર્યા રે
06 August, 2009
Quotes from Famous personalities 9
02 August, 2009
Quotes from famous personalities 8
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